Home राज्य बिहार किन्नरों के बस्ती की एक अलग परंपराएं जहां आज भी गुरु के...

किन्नरों के बस्ती की एक अलग परंपराएं जहां आज भी गुरु के आदेश बिना कोई कुछ नहीं करता, जानिए क्यों…

SHARE

Rajpath Desk : समाज किन्नरों को लेकर जानकारी की जिज्ञासा हर कोई रखता है। लेकिन, उसे मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश नहीं हो पाती है। आज इसी कड़ी में उनसे जुड़ी तथ्य को जानने की कोशिश करेंगे। दरअसल समाज की मुख्‍य धारा से दूर इस बस्‍ती की अपनी परंपराएं हैं। इनके रहन-सहन के तौर-तरीके भी अलग हैं। सीतामढ़ी शहर के मेला रोड स्थित नगर परिषद वार्ड-21 में एक छोटी सी बस्ती है। जिसे किन्नरों की बस्ती के रूप में जाना जाता है।

आधुनिकता के इस युग में भी ये किन्नर परंपरागत पेशा का अपनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। इनका मुख्य पेशा शिशु के जन्म पर अपने यजमानों के घर जाकर बधाई देना है। इनाम बख्शीस से जो भी आय होती है इससे इनका जीवन यापन चलता है। वर्षों से रह रहे इन किन्नरों को भले ही वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है लेकिन आज भी समाज की मुख्यधारा से नहीं जुट सकी है।

इस बस्ती में रहने वाले किन्नर सुबह 6 बजे उठ जाते हैं। 10 बजे तक नाश्ता करने के बाद ये बाहर निकल जाते हैं। यहां रहने वाले ज्यादातर किन्नरों की कमाई ट्रेनों में गाने के जरिए होती है। इसके अलावा शिशु के जन्म होने पर यजमानों के घर जाकर बधाइयां, समदौन, सोहर गाते है। यजमानों से जो भी इनाम मिलता है उससे गुजर बसर करते हैं। दिनभर कही भी हो लेकिन शाम होते ही ये अपनी बस्ती लौट आते हैं।

कहते हैं 1972 में समशुल नाम किन्नर यहां आई थी। तब इसके परिवार में दो लोग ही थे। इनमें शिष्य बनाने परंपरा चली आ रही है। करीब 20 वर्ष पहले समशुल ने ज्योति को अपना शिष्य बनाया। समशुल के स्वर्गवास होने के बाद बेदामी और अब ज्योति यहां की गुरु है। गुरु ज्योति के आदेश के बगैर ये लोग कोई भी कार्य नहीं करते हैं। किसी से मिलने की बात हो अथवा दिनचर्या तय करनी हो, सब गुरु के निर्देश पर ही होता है।

यूपी, झारखंड, बिहार, दिल्ली आदि के किन्नरों से भी इनका संपर्क है। समय समय पर ज्योति सम्मेलन में भाग लेने जाया करती है। ज्योति बताती है कि यह सब मेरे परिवार के सदस्य हैं। बाहर से आने वाले किन्नरों को ऊंचा स्थान दिया जाता है और उनकी पूरी खातिरदारी होती है। सम्मान देने में कोई कमी नहीं करते हैं। मेजरगंज को छोड़ जिले के अन्य प्रखंडों में रह रहे किन्नरों की देखभाल की जिम्मेवारी का निर्वहन करते हैं।

किन्नरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वोटर में लिस्ट में नाम जोड़ा गया है। पेशा के तहत इनका क्रियाकलाप घुमंतू है। इसलिए यहां रह रहे सभी किन्नरों का वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़ सका है। एक माहौल तैयार करने का प्रयास जारी है। इन किन्नरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शिक्षा के साथ सरकार प्रायोजित योजनाओं से जोड़ने की कोशिश है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here