Home राज्य उत्तर प्रदेश बाबरी मस्जिद मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जाए : याचिकाकर्ता

बाबरी मस्जिद मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जाए : याचिकाकर्ता

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नई दिल्ली :मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत से राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के मसले का समाधान करने के लिए मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की।

वहीं, हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मसले को बिल्कुल संपत्ति विवाद के रूप में देखते हुए इस पर सुनवाई की जानी चाहिए।

मुख्य याचिकाकर्ता मोहम्मद सिद्दिकी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने कहा कि देश के दो सबसे बड़े समुदायों के बीच विवाद का समाधान करने को लेकर मामले की गंभीरता और महत्व पर विचार करते हुए इसे वृहतर पीठ के पास सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए।

मुख्य वादी गोपाल सिंह विशारद की ओर से शीर्ष अदालत में दाखिल हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस दलील का विरोध किया और कहा कि मामले की सुनवाई सिर्फ संपत्ति विवाद के रूप में की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले को वृहतर पीठ के पास भेजने के लिए राजनीतिक या धार्मिक संवेदनशीलता आधार नहीं हो सकती है।

साल्वे ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ से कहा कि राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता को सर्वोच्च न्यायालय के परिसर से बाहर रखना चाहिए।

साल्वे ने कहा कि शीर्ष अदालत की प्रचलित परंपराओं व दस्तूरों के अनुसार किसी उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा दिए फैसले के खिलाफ अपील के मामले हमेशा सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ के पास निर्णय के लिए रखे जाते हैं न कि दो न्यायाधीशों की पीठ के पास।

भगवान रामलला विराजमान की ओर से दाखिल हुए वरिष्ठ अधिवक्ता के. पराशरण ने भी मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजने का विरोध किया।

आरंभ में रामचंद्रन ने कहा कि शीर्ष अदालत ने कई मौकों पर महत्वपूर्ण मामलों को संवैधानिक पीठ के पास सुनवाई के लिए भेजा है और इस मामले पर भी वृहतर पीठ को ही सुनवाई करनी चाहिए यह जनता से जुड़ा गंभीर मामला है।

मामले पर बहस बेनतीजा रही और अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख मुकर्रर की।

मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 2010 में दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए दाखिल याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि को निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का फैसला सुनाया था।

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