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अरुणाचल में चीन का अतिक्रमण अनियोजित : रपट

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नई दिल्ली, : राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक रपट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में सीमापार से घुसपैठ एक चूक थी, जोकि कुछ श्रमिकों द्वारा की गई थी और इसमें चीनी सैनिक शामिल नहीं थे। यह परिषद सुरक्षा से जुड़े मसलों पर प्रधानमंत्री को परामर्श देने वाला एक शीर्ष निकाय है। सूत्रों के मुताबिक, श्रमिकों के इस समूह को निर्माण कार्य सौंपा गया था और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का सामना होने से पहले समूह में शामिल लोगों को यह पता नहीं था कि वे भारतीय सीमा क्षेत्र में आ गए थे।

सूत्र ने बताया कि समूह में चीनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी की कोई संलिप्तता नहीं थी।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सटे ऊपरी सियांग जिले के बिशिंग क्षेत्र में घुसपैठ हुई थी, जहां दोनों देशों के बीच कोई स्वीकृत सीमा नहीं है। पर्वतीय इलाका और घुमावदार स्थलाकृति के कारण निर्माण कार्य कर रहे श्रमिकों ने भारतीय क्षेत्र में आकर 600 मीटर से ज्यादा लंबे ट्रैक बना दिए।

रपट में छह दिसंबर को हुई घटना का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि घुसपैठ अनियोजित थी। सड़क निर्माण दल का सामना जब आईटीबीपी से हुआ तो वे अपना सामान छोड़कर भाग गए।

चीन की ओर से भारतीय पक्ष से संपर्क कर सामान वापस करने का आग्रह किया गया। सामान में एक जेसीबी और पानी टैंकर शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर अगली बैठक में भारत सामान वापस करने वाला है।

भारत और चीन के बीच 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इसके अतिरिक्त कुछ मध्यवर्ती क्षेत्र में सीमा परिभाषित नहीं है। पूरब में चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है, जबकि नई दिल्ली पश्चिम में चीन के कब्जे वाले अकसाई चीन पर अपना दावा ठोकता है।

रक्षा मंत्रालय और और गृह मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया है कि इलाके में सीमा रेखा निर्धारित नहीं होने के चलते चीनी सैनिकों द्वारा अतिक्रमण की घटनाएं सामने आती रही हैं।

पिछले साल भारत, चीन और भूटान तीनों देशों की सीमा (तिराहा) पर चीन की ओर से करवाए जा रहे सड़क निर्माण कार्य में भारत के हस्तक्षेप के कारण दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने माना था कि गतिरोध से द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की स्थिति पैदा हुई।

दिसंबर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के स्टेट काउंसलर व कम्युनिस्ट पार्टी नेता यांग जिची के बीच सीमा के मसलों को लेकर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की 20वीं बैठक हुई। दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए आपसी स्वीकार्य समाधानों के जरिए मतभेदों को हल करने पर सहमति जताई।

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