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राज्यसभा पराली जलाने को लेकर चिंतित

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नई दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में पैदा हुई पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर चिंता व्यक्त की गई।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने शून्य काल में इस मुद्दे को उठाया और पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता देने की मांग की।

उन्होंने कहा, पराली जलाना चिंता का विषय है और इस वजह से उत्पन्न प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण(एनजीटी) ने भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है।

किसानों के लिए वित्तीय सहायता की मांग करते हुए, उन्होंने केंद्र सरकार से सहायता की मांग की।

बाजवा ने कहा, यहां तक कि नीति आयोग ने भी कहा है कि पराली जलाने की घटना को रोकने की लागत लगभग 11,000 करोड़ रुपये है। कुछ दिन पहले, श्रीलंका के क्रिकेटरों ने वायु प्रदूषण की वजह से क्रि केट खेलने से मना कर दिया था। क्या यह हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म का विषय नहीं है।

उन्होंने कहा, यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र रहने लायक नहीं है। प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक, कई विदेशी अधिकारी भी यहां रहते हैं। आपको धान कटाई के समय 200 रुपये प्रति कुंटल देने की जरूरत है और इसके लिए 11,000 करोड़ रुपये देना बहुत बड़ी कीमत नहीं है।

अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी यह जानना चाहा कि क्या सरकार किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बना रही है, ताकि इस समस्या का समाधान निकल सके।

उन्होंने कहा, यह हर वर्ष होता है। क्या सरकार किसानों के लिए ऐसे किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विचार कर रही है कि बिना पर्यावरण को क्षति पहुंचाए पराली को कैसे जलाना चाहिए।

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और इसपर चर्चा की जरूरत है।

प्रत्येक वर्ष, पंजाब व हरियाणा में करीबन तीन करोड़ टन धान के पुआल का उत्पादन होता है, जिसे बाद में जला दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की म़ुख्य वजह यही है।

 

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