Home राज्य दिल्ली दिल्ली सत्ता संघर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के प्रमुख बिंदु

दिल्ली सत्ता संघर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के प्रमुख बिंदु

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नई दिल्ली :सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच शक्तियों के विभाजन पर इन बिंदुओं को रेखांकित किया है।

– उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता के लिए बाध्य हैं।

– उपराज्यपाल के पास स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

– उपराज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह एवं सहायता पर कार्य करना होगा या उनके द्वारा किए गए किसी संदर्भ पर राष्ट्रपति द्वारा लिए गए निर्णय को लागू करना होगा।

– केंद्र के पास भूमि, पुलिस और कानून एवं व्यवस्था की कार्यकारी शक्तियों का विशेष अधिकार है।

– दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्तियां दिल्ली विधानसभा की विधायी शक्तियों के साथ सह-विस्तारित हैं।

– मंत्रिपरिषद की कार्यकारी शक्तियां भूमि, पुलिस, कानून-व्यवस्था को छोड़कर राज्य सूची या समवर्ती सूची में आने वाले सभी विषयों को कवर करती हैं।

– यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को मौजूदा संवैधानिक योजना के तहत राज्य का दर्जा दिया जा सकता है।

– दिल्ली के उपराज्यपाल का दर्जा किसी राज्य के राज्यपाल जैसा नहीं है।

– उपराज्यपाल एक सीमित प्रशासक हैं।

– संसद के पास राज्य सूची और समवर्ती सूची के तहत किसी भी मामले पर दिल्ली के लिए कानून बनाने की शक्ति है।

– दिल्ली विधानसभा के पास भी पुलिस, भूमि, कानून-व्यवस्था को छोड़कर बाकी सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है।

– राज्य की कार्यकारी कार्रवाई को समवर्ती और राज्य सूची के तहत आने वाले कुछ विषय पर संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुरूप होना चाहिए।

– उपराज्यपाल को दिमाग लगाए बगैर मशीन की तरह कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि मंत्रिपरिषद के हर निर्णय को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा जा सकता।

– उपराज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच वैचारिक मतभेद तार्किक होना चाहिए, सिर्फ बाधा पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए।

– उपराज्यपाल और मंत्रिपरिषद को चर्चा और संवाद के माध्यम से मतभेद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।

– उपराज्यपाल को अपने मंत्रियों के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए और उन्हें उनके हर कदम का विरोध नहीं करना चाहिए।

– मंत्रिपरिषद के फैसले पर उपराज्यपाल को सूचित किया जाना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसके लिए उपराज्यपाल की सहमति आवश्यक है।

– हमारा संविधान रचनात्मक है। इसमें तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है। इसमें अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है।

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