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अरुणाचल के नागाओं की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति की मांग

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इटानगर/नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के नागा छात्र संगठन ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू से गुजारिश की है कि वह प्रतिबंधित संगठनों में शामिल युवकों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति बनाएं, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।
अरुणाचल प्रदेश के 500 से ज्यादा नागा छात्र गैरकानूनी संगठनों के सदस्य हैं। नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एएनएसएफ) ने कहा कि ऐसी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से वे नागरिक जीवन में लौट आएंगे।

एएनएसएफ अरुणाचल प्रदेश का एक शक्तिशाली नागा युवा संगठन है। संगठन ने तिरप, चंगलांग और लॉन्गिंग जैसे नागा बस्तियों वाले जिलों में पैरामेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की है, ताकि युवा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में लगें और गैरकानूनी संगठनों से दूर रह सकें।

एएनएसएफ के अध्यक्ष नोकचा बोहम ने कहा, तिरपा, चंगलांग और लॉन्गिंग अरुणाचल प्रदेश के विकास से वंचित जिले हैं। ज्यादातर युवा हताशा में आकर गैरकानूनी समूहों में शामिल हो जाते हैं।

बोहम ने कहा, हम चाहते हैं कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति तैयार करे ताकि ऐसे युवा नागरिक जीवन में वापस आ सकें।

एएनएसएफ नेताओं ने कहा है कि वे रक्षा मंत्री अरुण जेटली और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अपनी मांगों को लेकर मिलेंगे।

संगठन ने तीन जिलों के लिए स्वायत्त परिषद की मांग को भी पुनर्जीवित किया है। संगठन ने इस क्षेत्र के लिए एक सैनिक स्कूल की भी मांग की है जिससे कि भारतीय सेना में शामिल होने के लिए किशोरों को शुरुआती उम्र में ही प्रेरित किया जा सके।

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