Home राज्य तमिल नाडु कावेरी पर फैसले का किसानों ने स्वागत किया, नेताओं ने विरोध

कावेरी पर फैसले का किसानों ने स्वागत किया, नेताओं ने विरोध

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चेन्नई| कावेरी नदी जल बंटवारे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। किसान समुदाय जहां इस फैसले को लागू किए जाने की ओर देख रहे हैं, वहीं राजनीतिक पार्टियों ने इस फैसले को राज्य के साथ धोखा बताया है। किसान नेता पी.आर. पांडियन ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया, “यह ऐतिहासिक निर्णय है, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी राज्य एक नदी पर अपना दावा नहीं कर सकता। केंद्र सरकार को अब नदियों को राष्ट्रीयकृत कर देना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के जल आवंटन में कटौती से हालांकि कावेरी-डेल्टा क्षेत्र में कृषियोग्य भूमि पर प्रभाव पड़ेगा। केंद्र सरकार को आदेश लागू कराने के लिए कदम उठाने चाहिए और यह देखा जाना जरूरी है कि तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी मिले।

पांडियन ने कहा, “कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड के गठित होने के बाद जल आवंटन का मामला देखा जा सकेगा। केंद्र सरकार को जल्द ही बोर्ड गठित करना चाहिए।”

तमिलनाडु कावेरी डेल्टा फार्मस वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव एस. रंगनाथन ने आईएएनएस से कहा, “हम फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार को कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड गठित करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “मैंने सर्वोच्च न्यायालय में सबसे पहले यह मामला दाखिल किया था। जब मैंने यह मामला दाखिल किया था, उस समय मैं 45 वर्ष का था और अब में 82 वर्ष का हूं।”

वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक नेताओं ने राज्य के जल आवंटन में कमी किए जाने का विरोध किया है।

पट्टाली मक्कल काची(पीएमके) के संस्थापक एस. रामादास ने कहा कि राज्य के पानी में कटौती तमिलनाडु के साथ अन्याय है।

उन्होंने हालांकि कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड गठित किए जाने के फैसले और इस संबंध में किसी भी प्रकार की अन्य अपील की संभावना खत्म करने के फैसले का स्वागत किया।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम(द्रमुक) के नेता एम. के. स्टालिन ने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम(एआईएडीएमके) सरकार को तमिलनाडु में पानी की हिस्सेदारी घटाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि राज्य के साथ धोखा हुआ है, जबकि न्यायालय के पहले के आदेश को नहीं मानने वाले कर्नाटक को ज्यादा पानी दिया गया।

डीएमके नेता दुरईमुरुगन ने एक टीवी चैनल से कहा, “तमिलनाडु में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में लगातार अपने वकील बदले और राज्य अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख सका।”

तमिलनाडु कांग्रेस के नेता थिरुनावुक्कारासर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि कर्नाटक कावेरी नदी के स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता।

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