Home राज्य ओडिशा लंबित मुद्दे सुलझने तक पोलावरम परियोजना रोके केंद्र : ओडिशा

लंबित मुद्दे सुलझने तक पोलावरम परियोजना रोके केंद्र : ओडिशा

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भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि जब तक सभी लंबित मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक पोलावरम सिंचाई परियोजना के निर्माण की अनुमति न दी जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, अगर बहु-उद्देशीय परियोजना को सभी लंबित मुद्दों को हल किए बिना पूरा करने की इजाजत दे दी जाती है तो यह ओडिशा और उसके लोगों के हितों के लिए स्थायी चोट का कारण बनेगा।

पोलावरम परियोजना बांध आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में गोदावरी नदीं पर निर्मित हो रहा है। यह बांध नदी के पानी को कृष्णा और अन्य नदियों में डालकर उसका उपयोग करने में मदद करेगा।

पटनायक ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी अक्टूबर में ओडिशा के साथ जारी विवादास्पद मुद्दों के हल नहीं होने तक निर्माण पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि ओडिशा की जनता इस परियोजना के कारण कई दिक्कतों का सामना कर रही है, जिसमें आदिवासी भूमि का जलप्लावन, उपजाऊ कृषि भूमि का बाढ़ की चपेट में आना और ग्रामीणों का बड़े पैमाने पर विस्थापन शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा, गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण (जीडब्ल्यूडीटी) आदेश के मुताबिक, पोलावरम परियोजना में इस तरह से बदलाव किया जा सकता है कि आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर जलप्लावन न हो। इसके लिए पोलावरम के कमान क्षेत्र में काम कर रहीं परियोजनाओं को ध्यान में रखने की जरूरत है। इस क्षेत्र में पत्तीसीमा परियोजना और दूसरी परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य की जायज चिंताओं को हल किए बिना क्षेत्र के हितों के बलिदान करने को लेकर वह गंभीर रूप से चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में पोलावरम परियोजना को एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।

पटनायक ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की मंजूरी से एकतरफा परियोजना शुरू की थी, इसलिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा द्वारा इस पर सहमति नहीं दी गई। सीडब्ल्यूसी की मंजूरी जीडब्ल्यूडीटी के आदेश के उल्लंघन में योजना/डिजाइन पर आधारित है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना का काम ओडिशा में जन सुनवाई के बिना भी किया गया था। साथ ही काम के लिए पर्यावरण मंजूरी पाने की आवश्यकता थी।

जन सुनवाई का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

 

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