Home देश स्वीडन, इंग्लैंड दौरे पर मोदी के एजेंडे में नवाचार, प्रौद्योगिकी शीर्ष पर

स्वीडन, इंग्लैंड दौरे पर मोदी के एजेंडे में नवाचार, प्रौद्योगिकी शीर्ष पर

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Rajpath Desk : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-20 अप्रैल के दौरान अपने स्वीडन और इंग्लैंड के दौरे पर जब पहली बार भारत-नॉर्डिक सम्मेलन और राष्ट्रमंडल देशों की सरकार के प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लेंगे तब नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग उनके एजेंडा में शीर्ष स्थान पर होंगे।

मोदी 16 अप्रैल की शाम स्टॉकहोम पहुंचेंगे। पिछले 30 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला स्वीडन दौरा होगा। इससे पहले 1988 में राजीव गांधी स्वीडन गए थे। मोदी 17 अप्रैल को स्वीडन के अपने समकक्ष स्टीफैन लोफवेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे जिसमें द्विपक्षी मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय व वैश्विक मसलों पर भी बातचीत हो सकती है।

भारत में स्वीडन के राजदूत क्लास मोलीन के मुताबिक, नवाचार भारत और स्वीडन रिश्ते का एक अहम पहलू है। उन्होंने कहा, हम आगे कैसे सहयोग करते हैं, अपने मेधावी लोगों को एक साथ लाते हैं, कुछ क्षेत्रों में पैसे खर्च करते हैं, जिन क्षेत्रों में ज्यादा सहयोग कर सकते हैं उनमें कैसे पैठ बनाते हैं और नई प्रौद्योगिकी विकसित करते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और कई मुद्दों पर टिकाऊ समधान पर विचार करते हैं। ये सब बातचीत के मुख्य पहलू हैं।

मोदी की यात्रा के दौरान भारत-स्वीडन नवोन्मेषी साझेदारी की शुरुआत होने की भी संभावना है। राजदूत ने कहा, मुझे लगता है कि हम भारतीय पक्ष की बात कर रहे हैं लेकिन सही मायने में आगे कैसा रुख रहेगा उसपर अंतिम निर्णय लेना होगा।

उन्होंने कहा, लेकिन मेरा मानना है कि दोनों तरफ से एक मंच बनाने पर विचार करने की जरूरत है जिससे निवेश आकर्षित हो और कंपनियों खुल सकें। मोलीन ने कहा, शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों में गहरे संबंध स्थापित होने के आसार हैं। हम अपने विश्वविद्यालयों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने की उम्मीद करते हैं। राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हो रही है।

हालांकि वर्ष 2016-17 में दोनों देशाों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.17 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 1.9 अरब डॉलर रह गया। वर्ष 2000 से स्वीडन की 170 कंपनियों ने भारत में 1.4 अरब डॉलर का निवेश किया है जबकि 70 भारतीय कंपनियों ने स्वीडन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

भारत और स्वीडन 17 अप्रैल को साथ मिलकर पहली बार भारत-नॉíडक सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। सम्मेलन में मोदी और लोफवेन के अलावा चार नॉर्डिक देश, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और नार्वे के प्रधानमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप) सुब्रत भट्टाचार्य के मुताबिक, नॉर्डिक क्षेत्र में उच्च आय वाला समृद्ध समाज है और वहां गुणवत्ता और नवाचार को तवज्जो दिया जाता है। मोदी के दौरे के संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, नॉर्डिक देश भारत के लिए स्वच्छ प्रौद्योगिकी, पर्यावरण समाधान, बंदगाहों के आधुनिकीकरण, शीतग़ृह श्रंखला, कौशल विकास, नवाचार के लिए संभावनाओं के स्रोत हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नॉर्डिक देशों के साथ भारत का कुल व्यापार 2016-17 5.3 अरब डॉलर का था। भारत में इन देशों से सतत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2.5 अरब डॉलर रहा है। मोदी 17 अप्रैल की शाम ब्रिटेन रवाना होंगे। मोदी के नवंबर 2015 में ब्रिटेन दौरा करने और नवंबर 2016 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे के भारत आने के बाद प्रधानमंत्री स्तर पर यह तीसरी बातचीत होगी।

भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त डोमिनिक एसक्विथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मोदी का यह दौरा तब हो रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बहुत ही अच्छा है।मोदी के इस दौरे को लिविंग ब्रिज एंड टेक पार्टनर्शिप का नाम दिया गया है। मोदी और मे के बीच 18 अप्रैल को द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है।

ब्रिटिश उच्चायुक्त ने बताया कि दोनों देशों के बीच पिछले साल व्यापार में 15 फीसदी का इजाफा हुआ। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवाओं के व्यापार के मामले में दोनों देशों के बीच संतुलन उल्लेखनीय है। उन्होंने बताया कि जी-20 देशों में ब्रिटेन भारत में सबसे बड़ा निवेशक है और भारत ब्रिटन में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।

संयुक्त सचिव (पश्चिम यूरोप) के. नागराज नायडू के मुताबिक, दोनों देशों की ओर से भारत-यूके प्रौद्योगिकी गठबंधन की घोषणा की उम्मीद की जा रही है। इसमें दोनों देशों के युवा सीईओ शामिल होंगे। ब्रिटिश उच्चायुक्त ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा पिछले साल भारतीय छात्रों को जारी किए गए वीजा में 30 फीसदी का इजाफा हुआ।

उच्चायुक्त के अनुसार, लंदन में 19-20 अप्रैल को राष्ट्रमंडल देशों की सरकारों के प्रमुखों की इस साल की बैठक में 50 देशों के मुखिया हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बैठक में शरीक होंगे। उन्होंने बताया कि बैठक के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, छोटे द्वीपीय देशों पर मंडराते खतरे, शांति स्थापित करना और अत्यंत गरीब देशों को मदद करना शामिल है।

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