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‘पकौड़ा’ पर क्यों मचाए हैं बवाल, क्या भूल गए बिहार का समोसा घोटाला

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से पकौड़े बेचने को रोजगार बताया है तब से ही सियासी गलियारों में घमासान मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर भी लोग पकौड़े तलते हुए फोटो खूब शेयर कर रहे हैं।
सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में अपने डेब्यू भाषण में प्रधानमंत्री की बात का समर्थन करते हुए कहा कि बेरोजगार रहने से अच्छा है पकौड़े बेचना। इतना ही नहीं, उन्होंने मोदी के चायवाला से प्रधानमंत्री बनने की तुलना करते हुए कहा कि पकौड़े बेचने वाले की अगली पीढ़ी उद्योगपति भी बन सकती है। अमित शाह के भाषण के बाद फिर एक बार इस पर चुटकी ली जा रही है।
पकौड़े पर चल रही सियासी खींचतान के बीच हम भला बिहार के समोसे को कैसे भूल सकते हैं जब दो समोसे 266 रूपये में खरीदे गये। जो समोसे बाजार में 10-20 रूपये में मिल जाते हैं, वहीं समोसे बिहार के बक्सर में बाल विकास परियोजना के अंतर्गत चल रहे प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी सेविकाओं को 266 रुपये में दो समोसे दिए जा रहे थे।
हद तो यह कि इसका खुलासा होने के बाद बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने व्यवस्था में सुधार न कर व्यवस्था पर अंगुली उठाने वाली सेविकाओं से ही स्पष्टीकरण मांग दिया। आंगनबाड़ी सेविकाओं के अनुसार, 266 रूपये में उन्हें चाय-नाश्ता, दोपहर का भोजन व अन्य सामग्री दिये जाने का आदेश था लेकिन संबंधित अधिकारी उन्हें  केवल दो समोसे देकर काम चला ले रहे थे।

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