मेला मंदिर श्री दाऊजी महाराज हाथरस के आर्य समाज मुरसान द्वार प्रचार शिविर में संध्या एवं यज्ञ हुआ।
हाथरस मेला मंदिर श्री दाऊजी महाराज हाथरस के आर्य समाज मुरसान द्वार प्रचार शिविर में आज संध्या ,एवं यज्ञ हुआ। पं रूपराम शर्मा , दिनेश अग्निहोत्री व बनवारी लाल गोस्वामीं ने इस पुनींत कर्म को पूर्ण कराया । श्री अमर सिंह आर्य, थान सिह तौमर व पुरुषोत्तम फौजी ने सुन्दर भजनों की प्रस्तुति दी ।
.अन्तर्राष्ट्रीय बैदिक प्रवक्ता आचार्य श्री वीरेन्द्र शास्त्री जी , सहारनपुर, का सम्मान दुपट्टा पहनाकर किया गया । आपने अपने उद्बोधन में बताया कि प्रत्येक मनुष्य सुख चाहता है जो उसे इस शरीर के माध्यम से बाह्य जगत से आत्मा को प्राप्त होता है परन्तु अन्त: करण के द्वारा उसे आनन्द प्राप्त होता है । इस प्रकार से 10 बाह्य करण-5 ज्ञानेन्द्रियों और 5 कर्मेन्द्रियों , तथा अन्त: करण चार- मन, बुद्धि , चित्त और अहंकार । इस प्रकार इन 14 करणौं से ही मुक्ति प्राप्त होती है । उन्हौंने एक आम समस्या का समाधान कि लोग यह समझते हैं कि मनुष्य मर.कर मनुष्य का ही जन्म लेता है। उन्हौंने बताया कि एक निशान्त मणि होती है वह जिसके भी पास होती है वह वैसे ही रंग रूप की हो जाती है उसका कोई लिंग नहीं होता । ठीक इसी तरह आत्मा का कोई लिंग नहीं होता ,
वह जिस शरीर को धारण करती है उसी जैसी हो जाती है और अविद्या के कारण अपने मूल स्वरूप आत्मा को भूल कर उस शरीर को ही अपना मूल स्वरूप मान बैठती है । सभी प्राणियों को मरने से भय लगता है ,सभी अपने शरीर से प्रेम करते हैं। योग दर्शन के अनुसार-हेयं दु: खं अनागतम, आगे आने वाले दु:खौं से हम इस मनुष्य योनि में ही बचने का उपाय कर सकते हैं , अन्य किसी योनि में नहीं ।यह मनुष्य योनि कर्म और भोग योनि दौनौं हैं यही मौका है जब हम शुद्ध ज्ञान प्राप्त कर दु:खौं से बच कर मुक्ति को प्राप्त कर सकते हैं । इसलिए हमें शुद्ध ज्ञान , शुद्ध कर्म और शुद्ध उपासना करनी चाहिए जो कि वैदिक ज्ञान से ही सम्भव.है और यह सत्य संग केवल आर्यसमाज के मंच से वैदिक विद्वानों द्वारा ही प्राप्त हो सकता है । आपके अमूल्य जीवन को सुखमय और आनन्दमय बनाने के लिए सदैव तत्पर आर्यसमाज प्रचार शिविर , मेला श्री दाऊजी महाराज हाथरस । आप सभी के स्वागत के लिए आतुर ।अधिक से अधिक संख्या में आपकी उपस्थिति ,आपके मंगलमय जीवन के लिए, प्रार्थनीय है ।
कार्यक्रम में बुद्धसेन आर्य , हरीशंकर आर्य, राजीव आर्य, दिनेश कुमार आर्य, तुलाराम सुमन, पुरुषोत्तम राठी, राजेन्द्र पलावत, दयाल सिंह प्रधान, अमरसिंह एड., सुभाष कुलश्रेष्ठ, पदम कुमार वर्मा, संजीव आंधीवाल, अशोक गुप्ता,बौबी लाला, सुभाष आर्य,वीनायती, प्रकाश वती आर्य,लीना कुलश्रेष्ठ, मंजू आर्य, विजय कुमारी आर्या, पुष्पलता आर्य प्रभु दयाल आर्य, प्रमोद आर्य आदि मौजूद रहे।
