कर्मों का फल हर मनुष्य को भोगना पड़ता है, आज के सत्कर्म ही संवारेंगे भविष्य : डॉ. मनमोहन गिरी
कर्मों का फल हर मनुष्य को भोगना पड़ता है, आज के सत्कर्म ही संवारेंगे भविष्य : डॉ. मनमोहन गिरी
योगिराज हितैषी बाबा ने किसान की फसल का उदाहरण देकर समझाया कर्म का सिद्धांत, प्रेम, दया, परोपकार और निष्काम भाव से कर्म करने का दिया संदेश

अलीगढ़। मनुष्य का जीवन उसके कर्मों से संचालित होता है। व्यक्ति जैसा बीज बोता है, समय आने पर उसे वैसी ही फसल प्राप्त होती है। अच्छे और बुरे कर्मों का परिणाम निश्चित है, इससे कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता। इसलिए मनुष्य को अपने वर्तमान कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि आज किए गए कर्म ही आने वाले कल की परिस्थितियों और भविष्य की दिशा तय करते हैं। यह आध्यात्मिक संदेश डॉ. मनमोहन गिरी (योगिराज हितैषी बाबा) ने मनुष्य के जीवन में कर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दिया।
उन्होंने कहा कि संसार में कर्म ही प्रधान है। मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख, सफलता-असफलता और विभिन्न परिस्थितियों के पीछे उसके कर्मों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कर्म की गति अत्यंत गहन और रहस्यमयी है, जिसे सामान्य मनुष्य के लिए पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। मनुष्य को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके द्वारा किए गए प्रत्येक कर्म का अपना एक परिणाम होता है और समय आने पर उसे उसका फल अवश्य प्राप्त होता है।
किसान की फसल से समझाया कर्मों का सिद्धांत
योगिराज हितैषी बाबा ने कर्म के सिद्धांत को समझाने के लिए किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसान पिछले वर्ष की फसल से प्राप्त अनाज को अपने भोजन के रूप में इस्तेमाल करता है और आने वाले वर्ष की फसल के लिए खेत में नए बीज बोता है, उसी प्रकार मनुष्य भी अपने पुराने कर्मों का फल वर्तमान में भोगता है और आज किए जा रहे कर्मों के माध्यम से अपने भविष्य की नींव तैयार करता है। खेत में बोया गया बीज समय आने पर फसल बनकर सामने आता है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य के कर्म भी समय के साथ अपना परिणाम देते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मनुष्य के लिए केवल पुराने कर्मों का फल भोगने का समय नहीं है, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर भी है। यदि व्यक्ति आज अच्छे कर्म करेगा तो आने वाले समय में उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। वहीं गलत कार्यों का परिणाम भी किसी न किसी रूप में सामने आता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार, व्यवहार और आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
दया, करुणा और परोपकार भी हैं श्रेष्ठ कर्म
डॉ. मनमोहन गिरी ने कहा कि अच्छे कर्म केवल पूजा-पाठ अथवा धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरों के प्रति प्रेम, दया, करुणा, सहयोग और परोपकार की भावना रखना भी श्रेष्ठ कर्मों में शामिल है। किसी का अहित न करना, जरूरतमंदों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही अच्छे जीवन की वास्तविक पहचान है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर अपने जीवन में आने वाली परेशानियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराता है, जबकि उसे स्वयं भी आत्मचिंतन करना चाहिए। अपने व्यवहार, विचारों और कर्मों का मूल्यांकन करने से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान सकता है। जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं, लेकिन अच्छे कर्म करने वाला व्यक्ति कठिन समय में भी धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच बनाए रखता है।
निष्काम भाव से किए गए कर्म बनाते हैं श्रेष्ठ व्यक्तित्व
योगिराज हितैषी बाबा ने कहा कि मनुष्य को वर्तमान में कर्म करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, इसलिए प्रत्येक कार्य सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। किसी भी काम को करते समय मन में द्वेष, ईर्ष्या और अहंकार नहीं रखना चाहिए। निष्काम भाव से किए गए अच्छे कर्म न केवल व्यक्ति के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाते हैं, बल्कि परिवार और समाज में भी सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि बीते हुए कर्मों का फल मनुष्य को भोगना पड़ता है, लेकिन वर्तमान में किए जा रहे श्रेष्ठ कर्मों से भविष्य को संवारा जा सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में अच्छे कर्मों का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा अथवा धन से नहीं, बल्कि उसके आचरण और कर्मों से होती है। कर्म ही मनुष्य की पहचान हैं और कर्मों का फल मिलना निश्चित है।
भगवान कृष्ण की आरती कर बाबा का किया सम्मान
इस अवसर पर मुख्य यजमान प्रबल प्रताप सिंह एवं रेखा सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी। कार्यक्रम में ठाकुर, विनय सिंह, रीना देवी, अवधेश कुमार, राजीव राणा, राम प्रताप सिंह, यतेंद्र ठाकुर, निर्मल सिंह, शारदा सिंह, अजय शर्मा, अशोक सिंह सहित अन्य श्रद्धालुओं ने योगिराज हितैषी बाबा का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
