मिट्टी और भूजल संरक्षण के लिए किसानों को सिखाए प्राकृतिक खेती के गुर

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मिट्टी और भूजल संरक्षण के लिए किसानों को सिखाए प्राकृतिक खेती के गु

 

 

सिकंद्राराऊ: नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत जिला गंगा समिति हाथरस के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सिकंद्राराऊ में किसानों के लिए एक दिवसीय प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और उन्हें पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विषय विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न पद्धतियों और उसके व्यावहारिक लाभों की विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके न केवल खेती की लागत घटाई जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति, भूजल स्रोतों और समग्र पर्यावरण का प्रभावी संरक्षण भी संभव है।
कार्यशाला के दौरान किसानों को देसी खाद, जीवामृत और जैविक कीटनाशकों के निर्माण व उपयोग के तरीके समझाए गए। इस मौके पर क्षेत्रीय वनाधिकारी सिकंद्राराऊ, जिला परियोजना अधिकारी हाथरस, विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधान, कृषि वैज्ञानिक तथा वन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने किसानों से प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

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